मैथिल संदेश साप्ताहिक मंसिर २०, २०८१
स्थानिय पत्रकार तथा साहित्यप्रेमी नागेन्द्रकुमार कर्ण “मैथिल संदेश साप्ताहिक” का सम्पादक एवं प्रकाशक हुनुहुन्छ। समाज, संस्कृतिको संरक्षण र जनचेतनामूलक लेखनमार्फत निरन्तर सक्रिय रहनुहुन्छ। प्रकाशक तथा सम्पादक कर्ण गाेरखापत्र दैनिककाे महाेत्तरी समाचारदाताकाे रुपमा पनि विगत डेढ दशकभन्दा बढी समयदेखि कार्यरत हुनुहुन्छ ।
Wednesday, July 2, 2025
ब्लगलाई आकर्षक बनाउने र मोनेटाइज (कमाई गर्ने) गर्ने
ब्लगलाई आकर्षक बनाउने र मोनेटाइज (कमाई गर्ने) गर्ने प्रक्रिया समय, योजना, र निरन्तर मेहनतको माग गर्छ। तलका चरणहरू अनुसरण गर्दा तपाईंको ब्लग राम्रोसँग चल्ने र आम्दानी हुने सम्भावना बढ्छ:
🔸 १. आकर्षक Blog बनाउने तरिका
✅ विषयवस्तु छनोट (Niche Selection)
-
यस्तो विषय छान्नुहोस् जुन तपाईंलाई रुचि छ र जसमा जानकारी पनि छ।
Tuesday, February 4, 2025
जलेश्वर क्षेत्रमा नाटक, मञ्चन र साहित्यिक कार्यक्रम ः एकादेशको कथा
Friday, June 28, 2024
Friday, March 15, 2024
Monday, January 22, 2024
Saturday, January 13, 2024
Thursday, December 28, 2023
Saturday, October 21, 2023
Monday, September 18, 2023
Monday, July 17, 2023
Thursday, July 13, 2023
मैथिल समुदायमे हराइत किछ लोक व्यवहार
मैथिल समुदायमे हराइत किछ लोक व्यवहार
नागेन्द्रकुमार कर्ण
मैथिली भाषाक बहुत शब्द, व्यवहार सभ गुम होइत जा रहल अछि ।
व्यवहार कोनो समुदायके सब स बडका गहना मानल गेल अछि । मैथिली समुदायके व्यवहार
देशमें मात्रे टा नहि विदेशोमें प्रशंसनीय मानल गेल अछि । आजुक दिन हम मैथिली
समुदायमे विगतमे प्रयोगमे होइत आयल किछ शब्द सभके चर्चा करब । कि अपने सभके बुझल
अछि, ‘नुत’, ‘भोज’, ‘भार’, ‘बएन’, ‘सनेस’, ‘ककरा कहल जाइत
छै । पुरान लोकमे प्राय: सभकोय के इ जानकारीमे हायत लेकिन एखनुक डिजिटल मिडियामे
आवद्ध रहल आ लोक व्यवहार स विक्षुप्त रहल बहुत लोकके इ जानकारी अभाव हायत । आई हम
एहि विषय पर चर्च करब । सब स पहिल शब्द छै ‘नुत’ । नुत के अर्थ न्यौत, निमन्त्रण, नेओता होइत अछि । घर, परिवारमे भोज आयोजन काल नुत, न्यौता देल व्यक्ति, परिवारके भोजन कराओल जाइत अछि । पहिल
पहिल कोनो शुभादि काममे हजाम मार्फत नुत पठाओल जयबाक चलन आ परम्परा छल मुदा एखन
ओहो चलन हरागेल अछि ।
दोसर शब्द छै, भोज । मैथिली समुदायमे कोनो काज
व्यवहारमे भोज देवाक वा करबाक चलन अछि । नुत, न्यौत, न्योता, निमन्त्रण देल गेल सभके एकेठाम सामुहिक रुपमे
बजाऽ खुवोनाईके भोज कहल जाइत अछि । पहिला पहिला अपन दियाद, स्वजाति, चौगामा, अठगामा, सभाके भोज आयोजन होइत छल । पहिला पहिला सामाजिक
सदभाव आ एकताके प्रतिकके रुपमे भोजके परम्परा छल ।
तेसर, चारीम आ पाँचम शब्द छै, भार’ ‘बएन’, आ ‘सनेस’ । भार शब्द स
भारी बुझाइत अछि । पहिला पहिला मैथिली समुदायमे कोनो विशेष पावनि वा शुभ कामके
अवसरिमे विभिन्न पकवान, फलफुल
सब बाँसके लकडीके दुनु कात चँगेरा वा ढकियामे सामान सभ राखि पठाओल जाइत छल । ओकरे
भार कहैत छल । प्राय पावनि, त्योहार
आ विशेष अवसरमे भारके आदानप्रदान कायल जाइत छल । भार अयला पर अडोस पडोसके से हो
देखबाक लेल बजाओल जाइत छल आ सभके कनि कनि देल से हो जाइत छल । अडोसी पडोसी सभके
भारके रुपमे आयल सामग्री वितरण कार्यके ‘बएन’ देनाइ कहल जाइत छल । भारके रुपमे आयल सामग्री
सभके सनेस कहल जाइत छै । सनेस के अर्थ कोसेली वा उपहार होइत अछि । सनेसमें प्रायस:
खाद्य सामग्री सभ होइत अछि ।
Tuesday, July 11, 2023
Monday, July 10, 2023
Sunday, July 9, 2023
Thursday, June 22, 2023
Saturday, June 17, 2023
Friday, May 26, 2023
Wednesday, May 24, 2023
Thursday, May 18, 2023
Tuesday, April 11, 2023
Tuesday, March 28, 2023
मैथिल संदेश साप्ताहिकको चैत्र ९ गते २०७९ को अंक ३३
मैथिल संदेश साप्ताहिकको चैत्र ९ गते २०७९ को अंक ३३




.jpg)
















